दिसंबर 2020
17.12.2020
हे प्रभु! यदि तू मेरी करनी का हिसाब -किताब करने बैठेगा तो मैं कभी भी मुक्त नहीं हो सकता। तू बख्शनहार है, मुझे भी बख्श दे और संसार सागर से पार उतर दे। - गुरु अर्जुनदेव जी
यह मनुष्य शरीर कुल मालिक ने हमें किराये पर दिया है, सांसों का किराया जिस दिन समाप्त हो जाएगा उस दिन बिना एक क्षण गंवाये वह जीवात्मा को शरीर से निकाल बाहर करेगा।
तुलसी वाक्
राम नाम अवलंब बिनु परमारथ की आस।
बरषत बारिद बूंद गहि चाहत चढ़न अकास।।
राम नाम का सहारा लिए बिना परमार्थ की आशा करना तो मानो बरसते हुए बादल की बूंद को पकड़कर आकाश में चढ़ने की आशा करने जैसा है अर्थात जैसे वर्षा की बूंद को पकड़कर आकाश पर चढ़ना असंभव है, वैसे ही रामनाम के बिना परमार्थ की प्राप्ति असम्भव है।
ਫਰੀਦਾ ਜਾਂ ਤਉ ਖਟਣ ਵੇਲ ਤਾਂ ਤੂ ਰਤਾ ਦੁਨੀ ਸਿਉ ॥
ਮਰਗ ਸਵਾਈ ਨੀਹਿ ਜਾਂ ਭਰਿਆ ਤਾਂ ਲਦਿਆ ॥੮॥
फरीदा जां तउ खटण वेल तां तू रता दुनी सिउ ॥
मरग सवाई नीहि जां भरिआ तां लदिआ ॥८॥
हे फरीद ! जब तेरा नाम की कमाई करने का समय था तो तू दुनिया में लीन रहा। इस तरह मौत निकट आती गई और जिंदगी पूरी होते ही कर्मों का बोझ लादकर यहां से चल पड़ा।
परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा।
पर निंदा सम अघ न गरीसा॥
वेदों में अहिंसा को परम धर्म माना गया है, जबकि परनिन्दा के समान भारी पाप कोई नहीं है।
लाभ राम सुमिरन बड़ो बड़ी बिसारें हानि।
गोस्वामी तुलसीदास जी
राम नाम का सुमिरन करना बहुत बड़ा लाभ है और उसे भुला देने में सबसे बड़ी हानि है।
यदि जीवन को चार भागों में बांट कर देखा जाए, तो विचार करें कि यदि हमने पहले भाग में विद्या अर्जित नहीं की, दूसरे भाग में धन अर्जित नहीं किया, तीसरे भाग में पुण्य अर्जित नहीं किए, तो अंतिम भाग में क्या करेंगे ?








