अगस्त 2020
31.08.2020
खुसरो शरीर सराय है, क्यों सोवे सुख चैन।
कूच नगारा सांस का, बाजत है दिन रैन।।
संत बिसुद्ध मिलहिं परि तेही।
चितवहिं राम कृपा करि जेही॥
सच्चे संत उसी को मिलते हैं, जिस पर प्रभु राम अपनी कृपा दृष्टि डालते हैं।
अमृत वचन
और कोई चिंता करने के बजाय यह चिंता करनी चाहिये कि मेरा कितना समय व्यर्थ की बातें करने में बरबाद हो गया, क्योंकि वह समय फिर से कभी हमें वापस नहीं मिलेगा। याद रखो हमें एक दिन मरना है।
- म. जयमल सिंह
श्री आदि ग्रंथ, अंग १२००
संत जना कै संगि मिलु बउरे तउ पावहि मोख दुआरु ॥
बिनु सतसंग सुखु किनै न पाइआ जाइ पूछहु बेद बीचारु ॥
हे बावले ! अगर संतों की संगति में रहेगा तो ही मोक्ष प्राप्त होगा। यदि वेदों के कथन पर विचार किया जाए तो वहां भी यही उल्लेख मिलता है कि सत्संग के बिना किसी ने भी सुख प्राप्त नहीं किया है। - गुरु रामदास जी
षट् दोषाः पुरुषेणेह हातव्या भूतिमिच्छता।
निद्रा तन्द्रा भयं क्रोधः आसस्यं दीर्घसूत्रता।।
यदि कोई तरक्की करना चाहता है तो उसे इन छह दोषों को त्यागना जरूरी है - नींद , जागते हुए भी कहीं खोए रहना, डर, गुस्सा, आलस्य, और किसी काम को टालने की आदत।
देखु फरीदा जि थीआ सकर होई विसु ॥
सांई बाझहु आपणे वेदण कहीऐ किसु ॥
ए फरीद! देख तो सही, मीठे लगने वाले विषय भोग विष जैसे दुखदाई हो गए हैं। ये दुख अपने प्रियतम के अलावा और किस से कहें?
दूसरों से बड़ा होने और दूसरों को अपने से छोटा मानने में बहुत अंतर होता है।
इसलिए खुद बड़े बनिए, दूसरे को अपने से छोटा मत मानिए।
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साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय॥
हे मालिक ! मुझे सिर्फ इतना ही दीजिए जिससे मेरा और मेरे परिवार का पालन हो सकेे और मेरे घर से कोई साधु या मेहमान कभी भूखा न जाए।
कबीर प्रेम न चक्खिया,चक्खि न लिया साव।
सूने घर का पाहुना, ज्यूं आया त्यूं जाव॥
जिस व्यक्ति ने कभी प्रेम का रस नहीं चखा और ना ही उसका आनंद लिया, ऐसा व्यक्ति उस मेहमान की तरह है जो किसी सुनसान घर में आता है और बिना कुछ किए खाली हाथ वापस चला जाता है।
बिनु बिस्वास भगति नहिं तेहि बिनु द्रवहिं न रामु ।
राम कृपा बिनु सपनेहुँ जीव न लह बिश्रामु।
विश्वास के बिना भक्ति नहीं हो सकती, भक्ति के बिना प्रभु कृपा नहीं करते और उनकी कृपा के बिना जीव सपने में भी शांति प्राप्त नहीं कर सकता।
बिगरी जनम अनेक की सुधरै अबहीं आजु।
होहि राम को नाम जपु तुलसी तजि कुसमाजु।।
तेरी अनेकों जन्मों की बिगड़ी हुई स्थिति आज अभी सुधर सकती है, यदि तू कुसंगति को छोड़ कर राम नाम का सुमिरन करने लग जाए।
जो आनंद सिंधु सुखरासी। सीकर तें त्रैलोक सुपासी॥
सो सुखधाम राम अस नामा। अखिल लोक दायक बिश्रामा॥
जो परमात्मा आनंद का सागर और सुख का भंडार है, जिसके एक कण से तीनों लोक तृप्त हो जाते हैं। उस सुख के धाम का नाम ही 'राम' है। वह सम्पूर्ण लोकों को शांति प्रदान करने वाला है।
- रामचरितमानस, बालकाण्ड
हजारों लड़ाइयाँ जीतने से अच्छा यह है कि
तुम स्वयं पर विजय प्राप्त कर लो। फिर जीत हमेशा तुम्हारी है। इसे तुमसे कोई नहीं छीन सकता, न स्वर्गदूत और न राक्षस।
महात्मा बुद्ध
रिश्ते कई हैं दुनिया में, पर ये रिश्ता कुछ खास है
बहना ने जो हाथों पे बांधा, वो धागा नहीं विश्वास है।
दूरी हो चाहे कोर्सों की, पर दिल से कभी न दूर है
खुशी हो या हो गम हो कोई, उसे हो जाता अहसास है।
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

























